Tag: Hindi Essays
पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं -पराधीनता Paradhin Sapnehu Sukh Nahi – Paradhinta भक्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसी को यह सूक्ति बड़ी ही सारगर्भित और भावप्रद है– ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।। …
सब दिन जात न एक समाना Sab Din Jaat na ek Samana प्रकृति का हर रूप परिवर्तनशील है। प्रकृति परिवर्तन के द्वारा सब कुछ करने में समर्थ है। प्रकृति …
साँच बराबर तप नहीं Sanch Barabar Tap Nahi यह सूक्ति निर्गुण भक्ति मार्गी कवि कबीरदास जी ने कही है कि सच्चाई से बढ़कर कोई तपस्या नहीं है। इस सूवित …
नारी जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी Nari Jeevan Haye Tumhari yahi Kahani यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। यत्रास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तुदाफलाः क्रिया।। इस सूक्ति का सामान्य …
जननी जन्मभूमिश्च Janani Janam Bhumi किसी कवि की यह उक्ति बड़ी ही सारगर्भित है कि- ‘जन्मदात्री माँ अपरिमिते प्रेम में विख्यात है। किन्तु वह भी मातृभूमि के सामने …
प्रयोगवाद Prayogwad सन् 2943 ई. में अज्ञेय के नेतृत्व में हिन्दी कविता के क्षेत्र में एक नये आन्दोलन का प्रवर्तन हुआ। इसे अब तक विभिन्न संज्ञा–प्रयोगवाद, प्रवद्यवाद, ‘नयी काय …
छायावादी काव्य Chayavadi Kavya हिन्दी साहित्य में द्विवेदी युग की प्रतिक्रिया स्वरूप जो काव्य धारा प्रवाहित हुई, उसे छायावादी काव्य के नाम से पुकारा गया। छायावाद के सर्वप्रथम रचनाकार …
हिन्दी साहित्य का स्वर्णयुग ‘भक्तिकाल Hindi Sahitya ka Swarn Yug Bhaktikal हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग ‘भक्तिकाल’ का उदय-अस्त काल संवत् 1375 से 1700 संवत् तक माना जाता है। …
मेरा प्रिय कवि-रामधारी सिंह ‘दिनकर‘ Mera Priya Kavi Ramdhari Singh Dinkar हिन्दी कविता के क्षेत्र में अनेक महान् रचनाकार हुए हैं जिन्होंने अपने युग को प्रभावित करते हुए आने …
कविवर जयशंकर प्रसाद Kavivar Jayshankar Prasad युग की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समय-समय पर युग-प्रवर्तक का * उदय होता रहा है। समाज और राष्ट्र की दशा को चित्रित …