मज़हब नहीं सिखाता, आपसे मैं बैर रखना Mazhab Nahi Sikhata, Aapas me Bair Rakhna “मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना। हिन्दी हैं, हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा।।” …
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत Man Ke Hare Haar Hai, Man ke Jite Jeet निबंध नंबर :- 01 मनुष्य का जीवन विविध प्रकार के संकल्पों …
सत्संगति – शठ सुधरहिं सत्संगति पाई Satsangati – Shath Sudhrahi Satsangati Payi सत्संगति ‘शब्द दो शब्दों के मेल से बना हुआ है। सत् + संगति’ अथति सच्चे या अच्छे …
परोपकार – परहित सरिस धर्म नहिं ‘भाई Paropkar – Parhit Saris Dharm Nahi Bhai महर्षि वेद व्यास के विषय में लिखा है– अटादश पुराणेषु व्यासस्य वचनं द्वयम् । परोपकाराय, …
पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं -पराधीनता Paradhin Sapnehu Sukh Nahi – Paradhinta भक्त शिरोमणि गोस्वामी तुलसी को यह सूक्ति बड़ी ही सारगर्भित और भावप्रद है– ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।। …
सब दिन जात न एक समाना Sab Din Jaat na ek Samana प्रकृति का हर रूप परिवर्तनशील है। प्रकृति परिवर्तन के द्वारा सब कुछ करने में समर्थ है। प्रकृति …
साँच बराबर तप नहीं Sanch Barabar Tap Nahi यह सूक्ति निर्गुण भक्ति मार्गी कवि कबीरदास जी ने कही है कि सच्चाई से बढ़कर कोई तपस्या नहीं है। इस सूवित …
नारी जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी Nari Jeevan Haye Tumhari yahi Kahani यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। यत्रास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तुदाफलाः क्रिया।। इस सूक्ति का सामान्य …
जननी जन्मभूमिश्च Janani Janam Bhumi किसी कवि की यह उक्ति बड़ी ही सारगर्भित है कि- ‘जन्मदात्री माँ अपरिमिते प्रेम में विख्यात है। किन्तु वह भी मातृभूमि के सामने …
प्रयोगवाद Prayogwad सन् 2943 ई. में अज्ञेय के नेतृत्व में हिन्दी कविता के क्षेत्र में एक नये आन्दोलन का प्रवर्तन हुआ। इसे अब तक विभिन्न संज्ञा–प्रयोगवाद, प्रवद्यवाद, ‘नयी काय …