कबड्डी का खेल
Kabaddi Ka Khel
कबड्डी का खेल अब गाँवों से बढ़कर शहरों, स्कूलों और कॉलेजों में भी खेला जाने लगा है। कबड्डी का मैदान भी अब खास तरह के घेरा में आगे के चित्र की तरह बना लेना उचित है । बराबर गिनती में दो दल दोनों घेरों में रहेंगे। मार्च-लाइन से फैसला करने वाले के सीटी बजाते ही दलों में नायक टॉस करते हैं। टॉस जीतने वाला दल दूसरे दल पर हमला करता है। हर दल अपना खिलाड़ी बारी-बारी से भेजता रहेगा। हमला करने वाले सभी खिलाड़ियों को इन दो नियमों को जरूर मानना होगा।
(1) जैसे ही वह मार्च-लाइन को पार करे, उसे ‘कबड्डी- कबड्डी…’ शब्दों को लगातार तब तक बोलना होगा, जब तक वह दूसरे के घर में हमला करता रहेगा।
(2) खिलाड़ी को ब्लॉक लाइन को एक बार जरूर पार करना पड़ेगा।
हमला करने वाला लड़का जिनको छू ले, वे मरे हुए माने जाएँ । यदि खेल के बीच में कोई खिलाड़ी (अपने मन से) सीमा के बाहर जाएगा, तो वह भी मरा हुआ ही समझा जाएगा।
जीतने के नियम-हमला करने वाला बिना ‘कबड्डी- कबड्डी’ बोलने से भी अपराधी समझा जाएगा। यदि एक से अधिक खिलाड़ी एक साथ ही हमला करें, तो वे भी अपराधी होंगे। ऐसे खिलाड़ियों को विरोधी दल का कोई भी लड़का ‘कबड्डी-कबड्डी’ बोलकर या चुपचाप छूकर ही मार सकता है।
प्वाइंट (नम्बर)-
(1) एक खिलाड़ी के मरने पर दूसरे दल को एक प्वाइंट मिलता है।
(2) यदि हमला करने वाले अंग से पकड़ते या छूते हैं, तो हमला करने वाले दल को एक प्वाइंट (नम्बर) मिल जाता है। इससे देह में चोट लगने का डर-भय नहीं रहता है।
(3) जब एक टोली में केवल एक या दो खिलाड़ी ही बच जाते हैं, तो उसका नायक उनको भी मरा हुआ घोषित कर सकता है, किन्तु सभी मरे हुए खिलाड़ियों पर एक नम्बर (प्वाइंट) देना होगा फिर दो प्वाइंट विशेष देकर वह अपने पूरे दल को भी जीवित कर ले सकता है।
(4) खेलते समय जिस खिलाड़ी को विरोधी दल अपनी सीमा-रेखा के बाहर कर देता है; वह धक्का देकर बाहर कर दिया जाने वाला लड़का एक प्वाइंट पा जाता है, किन्तु मरा हुआ नहीं माना जाएगा कोई।
(5) जो खिलाड़ी मरता है वह मैदान के बाहर बैठता है।
वह विरोधी दल के खिलाड़ी के मरने पर ही जीवित हो सकता है। इसी तरह खेल चलता रहता है।

