गुल्ली डंडा का खेल कैसे खेला जाता है। Gulli Danda Ka Khel Kaise Khela Jata hai Sampuran Jankari.

गुल्ली डंडा का खेल

Gulli Danda Ka Khel

 

विदेशी खेलों में जिस तरह क्रिकेट खेला जाता है, उसी तरह अपने यहाँ ‘गुल्ली डंडा’ भी खेला जाता है। परन्तु दोनों में अन्तर बस यही है कि क्रिकेट में कुछ टीमटाम और लाम- फाक रहता है, और गुल्ली डंडा बहुत ही सीधे ढंग से खेला जाता है।

नियम — इसमें दो दल होते हैं-दोनों दलों के दो-दो खिलाड़ी मैदान में आमने-सामने खड़े होते हैं। एक दल जो शुरू करता है, उसके हाथ में (एक-सवा हाथ लम्बा) डंडा होता है और दूसरे के हाथ में दो डंडे रहते हैं। शेष सभी अपने-अपने दल के पीछे सहायता के लिए खड़े रहते हैं ।

जीत के नियम – खेल शुरू करने वाला एक छोटा (पाँच छह अंगुल लम्बा) गड्ढा बना लेता है। उस पर (छह अंगुल लम्बी) एक गुल्ली रखकर अपने डंडे से जोर लगाकर फेंकता हैं।

(1) गुल्ली जब ऊपर-ऊपर ही रहे और विरोधी दल का खिलाड़ी, जिसके हाथ में दो डंडे हैं, वह अपने किसी डंडे से उस गुल्ली को अगर मार देता है तो दल का खिलाड़ी हार जाता है।

(2) अथवा विरोधी दल का कोई भी खिलाड़ी अपने हाथ में गुल्ली लोक (रोक) ले, तब भी वह हार जाता है। (3) अगर फेंकी गई गुल्ली जमीन पर गिर जाती है, तो उसे उसी जगह से (जहाँ से वह गुल्ली गिरी थी) कोई खिलाड़ी उसके डंडा पर गुल्ली फेंककर ठोकर मार देता है, तो भी वह हार जाता है।

अगर इन तीन तरीकों से वह हार जाएगा तब उसके दल का दूसरा खिलाड़ी आएगा और इसी तरह खेल चलता रहेगा।

उसके न हारने पर उसके दल के सब खिलाड़ी बारी-बारी से खेलेंगे।

क्रिया – खेल ऐसे होगा कि पहले तो डंडे से वह गुल्ली को फेंकेगा फिर उस गुल्ली को गड्ढे (घुच्ची) पर रखकर डंडे से उछालकर अपने डंडे से मारेगा और फिर जितनी दूर जाएगी, उसकी अपने डंडे से गिनती गिन लेगा। दोनों दलों में जिसकी सबसे अधिक संख्या होगी वह दल विजयी होगा।

नियम के साथ खेलने पर यह मनोरंजक खेल

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