फुटबॉल का खेल कैसे खेल जाता है। Football Ka khel Kaise khela Jata hai.

फुटबॉल

खुले मैदान में खेलने वाले जितने भी खेल हैं, उनमें फुटबॉल का खेल ही सबसे अधिक लोकप्रिय, लाभदायक और सस्ता है।

कहा जाता है, सन् 1530 ई. में फुटबॉल का जन्म इटली में हुआ था। इटली के सुन्दर नगर फ्लेरेंस से चलकर इसका प्रचार फ्रांस में हुआ और फिर इंग्लैंड से सारे संसार में फैल गया।

भारत में यह खेल कब से खेला जाने लगा, यह कहना कठिन है, फिर भी कहा जाता है कि सन् 1802 ई. में मुंबई की मिलिटरी और सिविलियन टीम में ही सबसे पहले फुटबॉल का मैच हुआ था ।

बात जो हो, पर हमारे धार्मिक-ग्रन्थों (रामायण, सुखसागर आदि) में भी गेंद (कन्दुक) खेलने की चर्चा है । माखनचोर श्रीकृष्ण ग्वालवालों के साथ यमुना किनारे गेंद खेला करते थे। एक दिन उनकी गेंद उस यमुना में जा गिरी। सभी उदास हो गए। गेंद कैसे निकले ? वहाँ तो काला नाग है। अंत में कृष्ण ने यमुना में घुसकर नाग को नाथा और गेंद को निकाल लिया। में

पहले यह खेल किस तरह खेला जाता था, (मालूम नहीं है, लेकिन आजकल फुटबॉल खेलने में ग्यारह ग्यारह खिलाड़ियों के दो दल होते हैं। इस खेल के मैदान की लम्बाई-चौड़ाई और बनावट निश्चित होती है। उसका चित्र आगे दिया जा रहा है।)

हर दल (टीम) में एक गोलकीपर, दो बैक, तीन हाफ बैक और पाँच फारवर्ड होते हैं। खिलाड़ियों के अलावा एक रेफरी और दो लाइनमैन होते हैं। इनका काम खेल और खिलाड़ियों की देखभाल करना है।

रेफरी जैसे ही सीटी बजाता है, फॉरवर्ड गेंद को झट से किक मारकर अपने दल के खिलाड़ी को दे देता है। एक दल अपने साथियों के साथ गोलपोस्ट की ओर बढ़ता है और दूसरा विरोधी दल अपने साथियों के साथ उसे रोकता है। बस इसी तरह खेल एक निश्चित समय तक चलता है और इसी बीच में आराम करने के लिए कुछ समय दे दिया जाता है।

इस फुटबॉल मैच के कुछ नियम हैं, जिनका सभी खिलाड़ी पालन करते हैं—

(1) गोलकीपर को छोड़कर कोई खिलाड़ी हाथ से गेंद नहीं छू सकता है।

(2) कोई खिलाड़ी किसी को धक्का नहीं दे सकता।

(3) विरोधी दल के किसी खिलाड़ी से पीछे की ओर से गेंद छीनना भी मना है।

(4) गोलकीपर जब गेंद पकड़ ले, तो कोई उसे धक्का नहीं दे सकता है।

(5) अगर गेंद लंबी लकीर से किसी तरह बाहर चली जाती

है, तो आउट हो जाती है। तब विरोधी दल का कोई खिलाड़ी उस जगह लकीर पर खड़ा होकर अपने दोनों हाथों से सिर के ऊपर से गेंद को सीधा मैदान में फेंकेगा।

(6) गेंद अगर गोलपोस्ट के जाले में चली जाए तो गोल समझा जाएगा।

(7) हर गोल के बाद गेंद मैदान के बीच में आती है। खेल नये सिरे से शुरू होता है।

(8) यदि गेंद गोल वाली रेखा के भीतर से गोल छोड़कर

किसी और जगह से बचाव करने वाली टीम के किसी खिलाड़ी को छूकर बाहर चली जाए तो कार्नर किक लगाई जाती है। यदि गेंद धावा बोलने वाले दल के किसी खिलाड़ी से छूकर जाएगी, तो गोल किक लगाई जाएगी।

(9) कार्नर-किक गोल लाइन के बिलकुल आखिरी भाग से विरोधी दल का कोई खिलाड़ी लगाता है।

(10) गोल किक के समय गेंद का हिलना-डुलना एकदम मना है।

आजकल यह खेल प्रायः सभी स्कूल-कॉलेजों में खेला जाता है।

Leave a Reply